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    Children's Stories

    भटकती आत्मा

    A horror story spanning across many periods. Win of Good over Evil

    भटकती आत्मा
    D

    Divyam Kanwal

    Class 8
    Bageshwar
    May 24, 2025

    Character – Abhinav, Sagar, Saraswati, Tantrik, Bharavnath, Shersingh
    Location – Kingdom of Madurai
    Theme – Horror, Bravery
    Genre – Horror
    Plot – Once there was a queen who killed her minister. Then the minister became a ghost. Now her next generation is defeating him.

    बहुत समय पहले की बात है।
    मदुरैई नाम के एक राज्य में सरस्वती नाम की एक शासिका थी। उसने कई राजाओं को हराया था।

    उसका एक मंत्री था शेरसिंह, जो सरस्वती से बहुत जलता था। वह चाहता था कि वह उसे मारकर खुद राजा बन जाए।

    एक बार उसने सरस्वती को मारने के लिए एक योजना बनाई, लेकिन सरस्वती को अपने गुप्तचरों से पता चल चुका था कि शेरसिंह एक चाल चल रहा है।

    तो उसने शेरसिंह को अपने सिपाहियों से पकड़वाया और भरी सभा के बीच जिंदा जला दिया।

    शेरसिंह तो मर गया, लेकिन उसकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिली।
    वह अपना बदला पूरा करना चाहता था।

    कुछ दिनों बाद सरस्वती के महल से अजीब-अजीब आवाजें आने लगीं।

    "मैं सरस्वती और उसके वंश का नामोनिशान मिटा दूँगा!"

    इससे भयभीत होकर सरस्वती एक तांत्रिक के पास गई।
    तांत्रिक ने कहा,

    "तुम्हारे मंत्री को, जिसे तुमने जिंदा जलाया था, उसकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिली है। इसलिए मुझे अपने मंत्र से उसे बुलाकर इस पवित्र बक्से में कैद करना होगा।"

    सरस्वती और तांत्रिक महल में गए।
    वहाँ तांत्रिक ने अपनी शक्ति से शेरसिंह की आत्मा को बुलाया और बक्से में बंद कर दिया।

    तांत्रिक ने सरस्वती से कहा,

    "यह बक्सा कभी नहीं खुलना चाहिए, नहीं तो यह आत्मा पूरी दुनिया को तबाह कर देगी।"

    यह कहकर तांत्रिक चला गया।

    कुछ दिनों बाद तांत्रिक की मृत्यु हो गई, और किसी कारणवश सरस्वती का राज्य भी नष्ट हो गया।

    सरस्वती के वंश के कुछ ही लोग जीवित बचे जो अलग-अलग जगह जाकर बस गए।

    आज का समय है।
    सरस्वती की 5वीं पीढ़ी के दो भाई, अभिनव और सागर, जो अपना घर बदल रहे थे, अचानक एक पुरानी किताब पाते हैं।

    जब उन्होंने उस किताब को पढ़ा, तो उन्हें सरस्वती और शेरसिंह की कहानी का पता चला।

    उस किताब में एक नक्शा मिला, जो सरस्वती के महल का रास्ता दिखाता था।
    उन्होंने वहाँ जाने का निर्णय लिया।

    महल पहुँचकर, उन्होंने छानबीन शुरू की और वह कमरा भी ढूँढ निकाला जहाँ वह बक्सा रखा था।

    अभिनव के मना करने के बावजूद सागर ने बक्सा खोल दिया।

    तभी बक्से से शेरसिंह की आत्मा बाहर निकल आई।

    वह बोली,

    "तुमने मुझे आज़ाद करके बहुत अच्छा किया! चलो, अब पहले तुम्हें ही खत्म करूँ!"

    यह सुनकर दोनों वहाँ से भाग खड़े हुए।

    घर लौटने पर उन्होंने देखा कि एक तांत्रिक पहले से ही उनके घर में बैठा था।

    "तुम कौन हो? और हमसे क्या चाहते हो?" अभिनव ने पूछा।

    तांत्रिक बोला,

    "मेरा नाम भैरवनाथ है। तुमने बहुत बड़ी गलती की है। वह आत्मा शेरसिंह की है, और वह तुमसे बदला लेना चाहता है!"

    अभिनव और सागर ने डरते हुए पूछा,

    "वह हमसे बदला क्यों लेना चाहता है? हमने क्या किया है?"

    "क्योंकि तुम सरस्वती के वंशज हो!"

    भैरवनाथ ने उन्हें पूरी कहानी सुनाई और कहा,

    "तुम्हें वापस महल जाना होगा। वहाँ एक गुप्त कमरे में महारानी सरस्वती की हड्डी रखी है। तुम्हें उसकी हाथ की हड्डी लानी होगी और उसी से शेरसिंह की आत्मा को खत्म करना होगा।"

    डरते हुए अभिनव और सागर महल लौटे।

    महल में चीख-पुकार मची हुई थी।

    अचानक एक खंबा सागर के ऊपर गिर पड़ा, लेकिन अभिनव ने उसे खींचकर बचा लिया।

    आगे बढ़ते हुए उन्हें शेरसिंह की आत्मा दिखी।

    वे तेजी से भागने लगे।

    जब उन्होंने पीछे देखा, तो वहाँ कोई नहीं था, लेकिन जब आगे देखा तो शेरसिंह कुल्हाड़ी लेकर उनकी तरफ बढ़ रहा था!

    भागते-भागते वे एक कमरे में जा घुसे।

    किसी चमत्कारी वजह से शेरसिंह उस कमरे में नहीं आ सका।

    अभिनव ने कहा,

    "सागर, लगता है कि यही कमरा है, जहाँ सरस्वती की हड्डियाँ हैं!"

    उन्होंने वहाँ खोदकर देखा, तो एक हाथ की हड्डी मिली।

    अब अभिनव हिम्मत करके बाहर आया और शेरसिंह के पास गया।

    शेरसिंह उसे मारने दौड़ा।

    जैसे ही वह पास आया, अभिनव ने उसकी छाती में हड्डी घोंप दी और शेरसिंह की आत्मा खत्म हो गई।

    इस तरह दोनों भाइयों ने शेरसिंह का अंत कर दिया और खुशी-खुशी अपने घर लौट गए।

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